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दत्तीगांव को जीताने का संकल्प लिया

रिपोर्टर- नारायण मकवाना


बिडवाल। कांग्रेस मंडल बिडवाल की बैठक रखी गई। जिसमें कांग्रेस प्रत्याशी राजवर्धनसिंह दत्तीगांव ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक सेक्टर व बूथ प्रभारी अपने अपने काम पर लग जाए और सदस्य प्रत्येक घर जाकर  कांग्रेस द्वारा घोषणा पत्र को आम जनता के बीच बताया जाए और किसान बेरोजगार आदि के फार्म भरवाए जाए। महिला सशक्तिकरण को भी साथ लेकर चले। बैठक में ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष कमलसिंह पटेल, विधानसभा अध्यक्ष विजयसिंह पवार, दिलीप पाटीदार कोद, भेरुलाल चावड़ा, मनीष पाटीदार रानीपुरा, आत्माराम जाट , दिनेश गिरवाल, विक्रम पटेल , साजिद खान के साथ ही  मंडलम अध्यक्ष विष्णु मरगला, सेक्टर प्रभारी सदाशिव बोरिया, संजू बना, दशरथ छपरा वाला, उमाशंकर बोरिया, उमेश पँवार उपसरपंच, रणछोड़ मरगला,  बाबूलाल निगम , महेश सिसोदिया, रामेश्वर पटेल जालमपुरा , गोपाल पाटीदार शेरगढ़, चुन्नीलाल  सिर्वी बिडवाल, रूपसिंह सिसोदिया, राहुल बना चिराखान, सत्यनारायण धाकड़ , मांगीलाल किशनपुरा,  गणपत कटारा भावलापड़ा, प्रहलाद लक्कड़ आदि उपस्थित थे।

विधायक बोले:- एक भैय्या कह रहे हैं सुदेश राय को वोट मत देना।


संजय त्यागी।

सीहोर।

विधायक सुदेश राय ने कहा कि

एक भैय्या क्षेत्र में घूम घूम कर कह रहे हैं मुझे वोट मत दो पर सुदेश राय को भी वोट मत देना ।

उन्होंने आगे कहा कि वह मुझे वोट देने का इसलिए मना कर रहे , क्योंकि मेने विधानसभा क्षेत्र में इन 5 सालों में लड़ाई झगड़े नहीं होने दिये, झूठी एफ आई आर नहीं होने दी, कोई मर्डर नहीं होने दिया, कोर्ट कचहरी में  परेशान नहीं होने दिया यह सब उन भैया को रास नहीं आ रहा है इसलिए  वो भैया क्षेत्र में घूम घूम कर कह रहे हैं सुदेश राय को वोट मत देना।

यह बात विधायक ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अहमदपुर में आयोजित चुनावी सभा में स्वागत भाषण करते हुए कही।

भाजपा प्रत्याशी सुदेश राय के इस बयान के नेता और कार्यकर्ता अपने अपने हिसाब से मायने निकाल रहे है हालांकि विधायक सुदेश राय ने किसी नेता का नाम नहीं लिया । किन के बारे में बोल रहे थे यह  लोग नहीं समझ पाए।

बदनावर में बागी के कारण भाजपा की राह मुश्किल, चार ने लिए नाम वापस

रिपोर्टर -अनूप जायसवाल

बदनावर। बागी राजेश अग्रवाल ने नाम वापस नहीं लिया है। इस कारण भाजपा की राह मुश्किल हो गई है। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया था। प्रदेश नेतृत्व के भारी दबाव के बावजूद वे नहीं माने। नामांकन वापस लेने के एक दिन पूर्व ही अग्रवाल अज्ञातवास में चले गए तथा अपना मोबाइल भी बंद कर लिया। इस कारण किसी से उनका संपर्क नहीं हो पाया। इसके पूर्व रविवार को भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी उन्हें मनाने पहुंचे थे, लेकिन उनसे भी अग्रवाल ने मुलाकात नहीं की। उनके काका अशोक अग्रवाल के माध्यम से उन्होंने संदेश दिया था कि वे कि सी भी कीमत पर उम्मीदवारी वापस नहीं लेंगे। 

स्थानीय नेताओं ने बुधवार दोपहर 3 बजे तक उनका इंतजार किया, लेकिन वे नहीं आए। अग्रवाल पिछले कई चुनाव से भाजपा से टिकट मांगते चले आ रहे थे। पिछले चुनाव में भी उन्होंने निर्दलीय फॉर्म भरा था। तब प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के समझाने पर वे मान गए थे व फॉर्म इस आश्वासन के साथ वापस ले लिया था कि अगली बार उनका ध्यान रखा जा सकता है।

अधिकृत प्रत्याशियों को बगावत पड़ी है भारी


यहां कांग्रेस या भाजपा में जब भी बगावत हुई है, तब-तब अधिकृत प्रत्याशियों को मुंह की खाना पड़ी है। 1998 में कांग्रेस में बगावत के कारण पराजय का मुंह देखना पड़ा था। तब राजवर्धनसिंह दत्तीगांव बगावत कर कांग्रेस के उम्मीदवार मोहनसिंह बुंदेला के सामने ताल ठोककर खड़े हो गए थे। 2003 व 2008 में बगावत के कारण भाजपा की हार हो गई थी। तब भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी खेमराज पाटीदार के सामने क्रमशः प्रकाश सावंत एवं रमेश पटेल रोड़ा बनकर खड़े हो गए थे। 1985 में कांग्रेस के रघुनाथसिंह माथुर के सामने कांग्रेस के ही सादिक अली बोहरा के खड़े होने के कारण कांग्रेस हार गई थी। इस चुनाव में अग्रवाल कांग्रेस एवं भाजपा दोनों को ही नुकसान पहुंचाएगे, लेकिन भाजपा को ज्यादा क्षति पहुंचेगी। उनकी पाटीदार एवं मुस्लिम मतदाताओं में अच्छी पकड़ है। अगर वे दमखम से लड़े, तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है।


आठ मैदान में


चार प्रत्याशियों के नाम वापसी के बाद अब मैदान में आठ प्रत्याशी रह गए हैं। राजेश अग्रवाल ने भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। वहीं कांग्रेस के बागी प्रत्याशी के साथ तीन अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों ने नाम वापस ले लिए हैं। निर्वाचन अधिकारी प्रतापसिंह चौहान ने बताया कि अंतिम सूची के मुताबिक भंवरसिंह शेखावत भाजपा, राजवर्धनसिंह दत्तीगांव कांग्रेस, समरथ कश्यप बसपा, विक्रम सोलंकी गोणवाना गणतंत्र पार्टी, शैलेंद्रकुमार शर्मा आप एवं संदीप पंवार प्रजातांत्रिक समाधान पार्टी मैदाना में हैं। इसके अलावा राजेश अग्रवाल एवं मुकेश कुमार मंडलोई निर्दलीय प्रत्याशी होंगे। इन्हें क्रमशः ट्रैक्टर चलाता कि सान व बांसुरी चुनाव चिन्ह दिया गया है। कांग्रेस के बागी अभिषेकसिंह राठौर, निर्दलीय राजेश मुनिया, दुलीचंद्र सिर्वी एवं बाबू खां ने फॉर्म उठा लिया है। इस चुनाव में आठ उम्मीदवार मैदान में रह गए हैं। जबकि 2013 में सात उम्मीदवार थे।

बदनावर में बागी के कारण भाजपा की राह मुश्किल, चार ने लिए नाम वापस।

मनोज कवि

बदनावर। बागी राजेश अग्रवाल ने नाम वापस नहीं लिया है। इस कारण भाजपा की राह मुश्किल हो गई है। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया था। प्रदेश नेतृत्व के भारी दबाव के बावजूद वे नहीं माने। नामांकन वापस लेने के एक दिन पूर्व ही अग्रवाल अज्ञातवास में चले गए तथा अपना मोबाइल भी बंद कर लिया। इस कारण किसी से उनका संपर्क नहीं हो पाया। इसके पूर्व रविवार को भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी उन्हें मनाने पहुंचे थे, लेकिन उनसे भी अग्रवाल ने मुलाकात नहीं की। उनके काका अशोक अग्रवाल के माध्यम से उन्होंने संदेश दिया था कि वे कि सी भी कीमत पर उम्मीदवारी वापस नहीं लेंगे। 

स्थानीय नेताओं ने बुधवार दोपहर 3 बजे तक उनका इंतजार किया, लेकिन वे नहीं आए। अग्रवाल पिछले कई चुनाव से भाजपा से टिकट मांगते चले आ रहे थे। पिछले चुनाव में भी उन्होंने निर्दलीय फॉर्म भरा था। तब प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के समझाने पर वे मान गए थे व फॉर्म इस आश्वासन के साथ वापस ले लिया था कि अगली बार उनका ध्यान रखा जा सकता है।

अधिकृत प्रत्याशियों को बगावत पड़ी है भारी


यहां कांग्रेस या भाजपा में जब भी बगावत हुई है, तब-तब अधिकृत प्रत्याशियों को मुंह की खाना पड़ी है। 1998 में कांग्रेस में बगावत के कारण पराजय का मुंह देखना पड़ा था। तब राजवर्धनसिंह दत्तीगांव कांग्रेस के उम्मीदवार मोहनसिंह बुंदेला के सामने ताल ठोककर खड़े हो गए थे। 2003 व 2008 में बगावत के कारण भाजपा की हार हो गई थी। तब भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी खेमराज पाटीदार के सामने क्रमशः प्रकाश सावंत एवं रमेश पटेल रोड़ा बनकर खड़े हो गए थे। 1985 में कांग्रेस के रघुनाथसिंह माथुर के सामने कांग्रेस के ही सादिक अली बोहरा के खड़े होने के कारण कांग्रेस हार गई थी। इस चुनाव में अग्रवाल कांग्रेस एवं भाजपा दोनों को ही नुकसान पहुंचाएगे, लेकिन भाजपा को ज्यादा क्षति पहुंचेगी। उनकी पाटीदार एवं मुस्लिम मतदाताओं में अच्छी पकड़ है। अगर वे दमखम से लड़े, तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है।


आठ मैदान में


चार प्रत्याशियों के नाम वापसी के बाद अब मैदान में आठ प्रत्याशी रह गए हैं। राजेश अग्रवाल ने भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। वहीं कांग्रेस के बागी प्रत्याशी के साथ तीन अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों ने नाम वापस ले लिए हैं। निर्वाचन अधिकारी प्रतापसिंह चौहान ने बताया कि अंतिम सूची के मुताबिक भंवरसिंह शेखावत भाजपा, राजवर्धनसिंह दत्तीगांव कांग्रेस, समरथ कश्यप बसपा, विक्रम सोलंकी गोणवाना गणतंत्र पार्टी, शैलेंद्रकुमार शर्मा आप एवं संदीप पंवार प्रजातांत्रिक समाधान पार्टी मैदाना में हैं। इसके अलावा राजेश अग्रवाल एवं मुकेश कुमार मंडलोई निर्दलीय प्रत्याशी होंगे। इन्हें क्रमशः ट्रैक्टर चलाता कि सान व बांसुरी चुनाव चिन्ह दिया गया है। कांग्रेस के बागी अभिषेकसिंह राठौर, निर्दलीय राजेश मुनिया, दुलीचंद्र सिर्वी एवं बाबू खां ने फॉर्म उठा लिया है। इस चुनाव में आठ उम्मीदवार मैदान में रह गए हैं। जबकि 2013 में सात उम्मीदवार थे।

सीहोर में पहली बार होगा चतुष्कोणीय मुकाबला।

मंजे हुए नेताओं में होगी टक्कर।

संजय त्यागी।

सीहोर। सीहोर विधानसभा में आज नाम वापसी के अंतिम दिन स्थिति साफ हो गई- अब यहां अभी तक हुए विधानसभा चुनावों के इतिहास में पहली बार चतुष्कोण मुकाबला होगा- इससे पहले के विधानसभा चुनावों में सीधी टक्कर और त्रिकोणीय चुनावी संघर्ष तो हो चुके हैं लेकिन इस विधानसभा चुनावों में चतुष्कोण  मुकाबला देखने को मिलेगा।

सीहोर विधानसभा में प्रमुख चार प्रत्याशी चुनावी मैदान में रहेंगे जिनका मतदाताओं पर अच्छा प्रभाव माना जाता है


भाजपा ने इस बार सुदेश राय को अपना उम्मीदवार बनाया है जो कि 2013 विधानसभा में निर्दलीय चुनाव जीतकर विधायक बने थे।

विधायक सुदेश राय 2008 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर भी चुनाव लड़ चुके हैं तब उन्हें हार का सामना करना पड़ा था अब वह पूरे दमखम के साथ भा जा पा से चुनावी मैदान में है।

कांग्रेस ने पूर्व सांसद सुरेंद्र सिंह ठाकुर को अपना उम्मीदवार बनाया है, कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह ठाकुर 2003 के विधानसभा चुनाव में सीहोर से उमा लहर में भा जा पा को कड़ी टक्कर दे चुके हैं। कांग्रेस ने उन्हें एक बार फिर मैदान में उतारा है।

सीहोर विधानसभा से दो भाजपा के वरिष्ठ नेता ही निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं।

निर्दलीय उम्मीदवार जिला सहकारी बैंक की अध्यक्ष उषा रमेश सक्सेना निर्दलीय चुनावी मैदान में है। ऊषा रमेश सक्सेना पिछले 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी हैं जिसमें वह बहुत कम अंतर से निर्दलीय उम्मीदवार सुदेश राय से पराजित हो गई थी। इस चुनाव मे ऊषा सक्सैना निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं।

दूसरे निर्दलीय उम्मीदवार गौरव सन्नी महाजन है। सन्नी महाजन का परिवार जनसंघ के समय से भाजपा से जुड़ा रहा है। एक समय कई वर्षों तक पूर्व विधायक मदन लाल त्यागी और महाजन परिवार ही भा जा पा के अगुआ रहे हैं।

निर्दलीय प्रत्याशी सननी महाजन का पिछले कई वर्षों से क्षेत्र में लगातार संपर्क रहा है सन्नी महाजन 2008 के विधानसभा चुनावों में उमा भारती की भारतीय जनशक्ति पार्टी से चुनाव लड़ चुके हैं सनी महाजन को उस समय शिवराज लहर में 20 हजार के लगभग वोट मिले थे।

पुलिस और प्रशासन में शहर में निकाला फ्लैग मार्च।


संजय त्यागी।
सीहोर।
पुलिस ने चुनाव के लिए कमर कस ली है पुलिस और प्रशासन चुनाव के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।
सीहोर में आज पुलिस और प्रशासन ने आगामी चुनाव के मद्देनजर शहर के प्रमुख मार्गो से फ्लैग मार्च निकाला।
फ्लैग मार्च में पुलिस अधिकारी  एवं पुलिस के जवान तथा एसएसबी के जवान हथियारों के साथ शहर की सड़कों पर गुजरे।
फ्लैग मार्च में एसडीएम वरुण अवस्थी सी एस पी ओ पी त्रिपाठी थाना प्रभारी संध्या मिश्रा सहित पुलिस एवं एसएसबी के जवान शामिल रहे।